Monday, July 29, 2019

ये सब कोई नहीं बताएगा, पढ़ लीजिये। फायदे में रहेंगे! #हीरेंद्र

आप सबकी सुविधा के लिए क्रम से लिख देता हूँ.

१. अगर आपका कैमरा चोरी हो जाए तो परेशान न हों. आप Stolencamrafinder.com पर जायें।  जहाँ आप अपने कैमरे से खींची हुई कोई तस्वीर अपलोड कर दें (हर फोटो का एक एम्बेड नंबर होता है). जब कोई आपके कैमरे से खींची गयी तस्वीर इंटरनेट या सोशल मीडिया पर कहीं शेयर करता है तो इसकी सूचना आपको मिल जायेगी। फिर आप चोर का लोकेशन थोड़ी कोशिश करके पा सकते हैं.

२. Duolingo.com पर जाकर आप कोई भी दूसरी भाषा आसानी से सीख सकते हैं. हाँ अभ्यास करते रहना होगा।

३. आपकी नींद पूरी नहीं हुई है. चलिए कोई बात नहीं। अब ये कीजिये कि मन में सोच लीजिये की आप बहुत ही गहरी नींद से जागे हैं और तरोताज़ा महसूस कर रहे हैं. सिर्फ ऐसा करके ही आप दिन भर बेहतर महसूस कर सकते हैं. यकीन नहीं, चलिए कभी आज़मा कर देखिये। हाँ, इस दौरान ये भूल से भी मत सोचियेगा कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है.

४. मान लीजिये आपने किसी गाड़ी को टक्कर मार दी. अब टक्कर मार तो दी लेकिन, उस वक़्त सॉरी नहीं बोलियेगा। आपका सॉरी बोलना कोर्ट में आपके खिलाफ जा सकता है. ज़ाहिर है सॉरी बोलकर आप अपनी गलती मान रहे हैं.

5. तारीख के हिसाब से पैसे बचाइए। जैसे एक तारीख को एक रूपया। दो तारीख को दो रूपया , उसी तरह 30 तारीख को 30 रूपया। ऐसा आप एक साल तक रोज़ करें। यह बचत बहुत आसान है. जानते हैं एक साल के बाद आपके पास कितने रुपये होंगे। लगभग 5 हज़ार सात सौ रुपये। तो कब से शुरू कर रहे हैं ये बचत?

६- अगर आप हवाई यात्रा करते हैं तो 6 से 8 सप्ताह पहले टिकट बुक करें। टिकट आप मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही बुक करें। यात्रा का दिन भी मंगल, बुध या गुरुवार हो. इस दिन टिकट सबसे सस्ता होता है. रविवार को उड़ना तो छोड़िये टिकट बुक करना ही महंगा पड़ता है. क्योंकि ज़्यादातर लोग रविवार को ही फुर्सत में होते हैं टिकट बनाने के लिए.

७- क्या आपको पैसे कमाने हैं? अगर आप 87 दिनों तक एक बिस्तर पर ही बैठे रह सकें तो नासा आपको 15 हज़ार डॉलर देता है। दरअसल वो ऐसा करके उनकी ज़ीरो ग्रेविटी पर रिसर्च करने की योजना है.


सोर्स: Pinterest.com

Saturday, July 27, 2019

घड़ी को गुदगुदी लगाता हूँ- हीरेंद्र

तू किसी रेल सी गुजरती है
मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ -दुष्यंत कुमार


अब मेरी तुकबन्दी देखिये
रात तू चाँद बन निकलती है
मैं आसमाँ तारों से सजाता हूँ
मन में एक रौशनी उतरती है
जब तुझको गले लगाता हूँ
शाम में रंग भरने लगता है
जब तेरा नाम गुनगुनाता हूँ
मिलन का है मज़ा जुदाई में
आज जाने दे कल आता हूँ
मेरी लाइफ तुझी से रौशन है
जो भी मिलता उसे बताता हूँ
कभी तो वक़्त मुस्कुराएगा
घड़ी को गुदगुदी लगाता हूँ #हीरेंद्र


'अभागा सावन' - हीरेंद्र

एक कवि ने अब सावन पर लिखना बंद कर दिया है. लिखे भी क्यों जब इन बादलों से ज़्यादा पानी उसकी आँखों में है? बचपन में वो लिखा करता था बादलों के नाम ढेरों प्रेमपत्र और फिर उनकी नाव बनाकर वो बहा देता था किसी अंजाने पते पर. इस उम्मीद में कि एक दिन ज़रूर आएगा उसके इन चिट्ठियों का जवाब!

सुना है कि इस मौसम में कभी वो बेलपत्रों पर ॐ नमः शिवाय का मंत्र भी लिखा करता तो  कभी किसी की हथेली में लगी मेहँदी में ढूंढता था अपना लिखा नाम. जिन हरी काँच की चूड़ियों ने कभी उसका मन खनकाया था वो अब टूटकर उसके कलेजे में कहीं धँस सी गई है. अब उसके लिए सावन का मतलब सिर्फ बारिश होने का एक मौसम भर है.

अब उसके मन में कोई मोर नहीं नाचता. सावन के झूलों का तो पता नहीं लेकिन, अब वो झूलता रहता है अतीत के उन अँधेरों में जहाँ अब उसे कोयल की कूक भी झूठी लगती है.  इतना अभागा ये सावन कभी न था. क्योंकि एक कवि ने अब सावन पर लिखना बंद कर दिया है. #अभागासावन #हीरेंद्र

Friday, July 26, 2019

एक छोटी सी कविता

आते हैं रात में भी दिन के ही ख़्वाब मुझको
काँटे भी चल के आये देने गुलाब मुझको
आँखों में बच गया है थोड़ा सा अब भी पानी
नहीं चाहिए जी छोड़ो कोई हिसाब मुझको
जल रहा हूँ मैं तभी से क्या बताऊँ ये किसी से
कोई कह के हाँ गया था इक दिन तेज़ाब मुझको
बस यही है एक ख़्वाहिश न चाहूँ इससे ज़्यादा
गुज़रुं जिधर से दुनिया करे आदाब मुझको #हीरेंद्र

Friday, July 19, 2019

नागों के बारे में कुछ दिलचस्प बातें! #हीरेंद्र

बचपन से हम सबमें साँपों को लेकर एक अलग तरह की जिज्ञासा होती है. उसमें भी अगर बात नाग की हो तो देह में सिहरन सी दौड़ जाती है. आइये नागों के बारे में एक छोटी सी बात बताऊँ आपको!

पुराणों में आठ प्रकार के नागों का वर्णन मिलता है. ये हैं शेषनाग, वसुकि, तक्षक, कार्कोटक, शंखपाल, गुलिका, पद्म और महापद्म। ये सब अपने रंगों से पहचाने जाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि वसुकि मोती की तरह सफ़ेद रंग का तो तक्षक लाल रंग का होता है.

कार्कोटक काले रंग का ऐसा नाग है जिसके सिर पर त्रिशूल सा निशान होता है. पद्मनाग के बारे में बताया गया है कि ये कमल की तरह गुलाबी रंग का होता है और जिसके शरीर पर सफ़ेद धारी जैसे निशान होते हैं. महापद्मा भी सफ़ेद रंग और  त्रिशूल के निशान वाला नाग है. जबकि शंखपाल पीले रंग का है और जिसके सिर पर सफ़ेद निशान होता है. गुलिका लाल रंग का होता है जिसके माथे पर आधे चंद्रमा की तरह आकृति होती है.


वसुकि को नागों का राजा कहा जाता है. समुद्र मंथन के समय मंदार पर्वत से वसुकि को ही देवताओं और असुरों ने रस्सी की तरह इस्तेमाल किया था. शिव जी के गले में यही वसुकि नाग लिपटा होता है. आप समझ सकते हैं शिव जी कितने विराट होंगे, जो वसुकि जैसे विशालकाय नाग को अपने गले में हार की तरह लपेटे हैं. वसुकि ही वो नाग है जिसके माथे पर नागमणि है. 



मनसा देवी जो शिव जी की पुत्री कही जाती हैं, उनके बारे में ऐसी मान्यता है कि वो दरअसल वसुकि की बहन है और ज़ाहिर है वो भी नाग कुल से ही हैं. हिन्दू धर्म के अलावा बौद्ध धर्म में भी वसुकि समेत इन आठों नागों के बारे में बताया गया है. शेषनाग के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वो क्षीरसागर में हैं जिसपर विष्णु भगवान लेटे हुए हैं और शेषनाग ने पूरी पृथ्वी को अपने सिर पर संभाला हुआ है. इन दोनों के अलावा तक्षक और परीक्षित की कहानी भी आप सबने सुनी होगी!

चलते-चलते यह भी बता दूँ कि तमिलनाडु में नागरकोइल (Nagercoil) नामक एक जगह है वहां पर एक प्रसिद्ध नाग राजा मंदिर है. उस मंदिर में ये आठों नाग एक साथ विराजमान हैं जहाँ इनकी पूजा होती है. नागरकोइल से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर कन्याकुमारी है.

हीरेंद्र झा, मुंबई

Friday, July 12, 2019

Movie Review: Super 30

आनंद कुमार की कहानी में कितनी सच्चाई है, ये मैं नहीं जानता.. लेकिन, 'सुपर 30' फिल्म में रितिक रौशन के जरिये जिस गणित के अध्यापक आनंद कुमार की कहानी दिखाई गई है वो अद्भुत है..

हाल के पांच, सात वर्षों में मुझे ध्यान नहीं पड़ता कि किसी फिल्म ने इस कदर छुआ हो.. रितिक रौशन दिल जीत लेते हैं. ये फिल्म हमें बार बार इमोशनल कर जाती है, एक बेहतर इंसान बनाती है..दूसरों के बारे में सोचना सिखाती है.. एक उम्मीद देती है..एक भरोसा जगाती है..

ये फिल्म आप अपने परिवार के साथ देख सकते हैं और मैं गारंटी के साथ यह कह सकता हूँ कि आप निराश नहीं होंगे.. ठीक है.. थैंक्यू #हीरेंद्र 

Movie Review #Dream Girl

आयुष्मान खुराना की फिल्म 'ड्रीम गर्ल' हँसते-हँसाते हुए समाज का एक ऐसा बेबस चेहरा दिखा जाती है जो हमें डराती भी है और सोचने पर भी मजब...