Wednesday, February 05, 2014

एक चिड़िया को प्रेम हो गया! उसे बिल्कुल भी भान न था कि जिस शख्स से वो प्यार कर बैठी है वो कोई चिड़ीमार है! चिड़िया के पास ढेरो सुनहरे पंख थे, ज़ाहिर है चिड़ीमार के पास अब पैसों की कोई कमी नहीं रही! सोने की खान पर बैठी चिड़िया कब सोने के पिंजरे में क़ैद हो गयी उसे अंदाजा ही न हो सका! वो बीमार रहने लगी। उसके पर कतरे जा चुके थे! उसे आभास हो गया कि अब जाना है! अलविदा दुनिया! प्रेम करना और निभा पाना कहाँ सबके बस की बात है? आज जाने दो, अभी थोड़ा वक़्त लगेगा किसी पर दुबारा भरोसा करने में! मैं जल्दी ही आउंगी एक बार फिर से सच्चे प्रेम की तलाश में! उम्मीद करती हूँ अगली बार यूँ टूटकर नहीं बिखरुंगी! क्या कहा कुछ ज्यादा मांग लिया क्या मैंने? 
(एक अधूरी प्रेम कथा, इसे किसी घटना से जोड़कर न देखें! - हिरेन्द्र )