Monday, July 15, 2013

" भारत निर्माण"

हम सब अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी ईमानदारी से निभाएँ...आओ नया इंडिया बनाएँ.." वे लोग बेशक न कर पा रहे हों " भारत निर्माण", हम ही बना लें एक नया हिन्दुस्तान.."

एक अलग तरह का शून्य

शून्य में उतर जाने के लिए कुछ लोग नशा करते हैं..कुछ समाधि और कुछ योग भी, कुछ सम्भोग भी! पर, कभी काम में डूब कर देखिये..एक अलग तरह का शून्य उभरता है..कुछ नहीं दिखता, कुछ नहीं मालुम पड़ता..आप अपनी ही एक दुनिया में होते हैं..आप सबको मिस करता हूँ..कुछ लोगों की लेखनी नहीं पढ़ पाने का मलाल रहता है..

छोटी कविता

जनता जो भीड़ है भीड़ जो गुम है.. गुम बोले तो बेबस बेबसी यानी घुटन घुटन बोले तो अंत अंत तो मौत है भीड़ ने एक चेहरा चुना चेहरे पर एक पह...