Saturday, September 26, 2015

(एक प्रेम गीत, संडे स्पेशल)

मान जाइए अब न आना-कानी कीजिये
एक मीरा को फिर से दीवानी कीजिये...
तरसे हैं उम्र भर हम इसी आस में
कि मुझको आप अपनी राधा-रानी कीजिये...
देना चाहती हूँ हर खज़ाना आपको - २
आ जाइए हमको महादानी कीजिये..
कविताएं बहुत सुनीं हूँ आपसे मेरे सजन
आज से शुरू कोई कहानी कीजिये...- २
सदा रहिये संग मेरे बन के मिसाले-हिंद
ऐसे टूट के मोहब्बत खानदानी कीजिये...
मान जाइए अब न आना-कानी कीजिये
एक मीरा को फिर से दीवानी कीजिये...हीरेंद्र
(एक प्रेम गीत, संडे स्पेशल)

Tuesday, April 14, 2015

सफ़र तो अभी जारी है: इरशाद कामिल

चमेली, जब वी मेट, मेरे ब्रदर की दुल्हन और रॉकस्टार जैसी फ़िल्मों के गाने लिखने वाले गीतकार इरशाद कामिल अपने सुकून भरे गीतों के लिए जाने जाते हैं लेकिन इस नाज़ुक दिल शायर के अंदर रहता है एक शख़्स जिसमें ज़माने भर के लिए ग़ुस्सा और खीझ है. एक दिन जनसत्ता में अचानक रात के डेढ़ बजे मैं अपना डबल कॉलम लिख कर घर आ रहा था. अचानक दिमाग में बात आई कि, इरशाद कामिल क्या तुमने ये सोचा था कि बड़े होकर खुशवंत सिंह बनोगे, या कुलदीप नैयर बनोगे? तो अंदर से आवाज़ आई, नहीं ये तो नहीं सोचा था. और अगली ही सुबह मैंने इस्तीफ़ा दे दिया. फिर कुछ दिन चंडीगढ़ में घुमक्कड़ी और थिएटर करने के दौरान यूं ही एक दिन लेख टंडन से मुलाकात हो गई. लेख टंडन को लेखक की ज़रूरत थी. फिर क्या था मैंने उनके सीरियल 'कहां से कहां तक' के लिए 22 दिन सेट पर बैठकर डायलॉग लिखे.मैंने पीएचडी के दौरान कविता विषय यही सोच कर चुना था कि काम की जो बारीकियां हैं, उसे सीखूं.
मैं इन दिनों अपने भीतर वह ज़मीन तैयार कर रहा था, जहां से एक लेखक का जन्म हो सके. ये भी इत्तेफ़ाक की ही बात है कि इम्तियाज़ अली से मुलाक़ात हो गई और उन्होंने मुझे 'सोचा न था' में मौक़ा दे दिया.इम्तियाज़ के साथ का जो सिलसिला चला वो अब तक चल रहा है. 'जब वी मेट' के सारे गाने लोगों को बहुत पसंद आए थे. इस फ़िल्म ने मुझे एक अलग तरह की पहचान दी थी.इसके बाद आई 'रॉकस्टार'. 'रॉकस्टार' ने असल वाले इरशाद को, जिसके लिए रोमांस उतनी सस्ती और उतनी उथली चीज़ नहीं थी, लोगों के सामने ला खड़ा किया.अब लोगों के सामने वो इरशाद आया जो सिर्फ गीतकार नहीं है, थोड़ा सा साहित्यकार, थोड़ा सा शायर भी है. जिसके अंदर दुनिया के लिए खीझ है. जो ऊपर से भले ही बहुत नरम लगता हो, मगर अंदर पूरा का पूरा जल रहा है. लोगों के सामने वो इरशाद आया है जिसके अंदर दुनिया के लिए खीझ है. जो ऊपर से भले ही बहुत नरम लगता हो, मगर अंदर पूरा का पूरा जल रहा है.व्यावसायिक होते हुए भी हम किस हद तक साफ दिल हो सकते हैं, अपनी सीमाओं को बढ़ा सकते हैं, ये रॉकस्टार ने बता दिया.

अपने आप से तो कोई शिकायत नहीं है दुनिया से ज़रूर है. मेरे अंदर बहुत कुछ ऐसा है जिसे सिनेमा निकाल नहीं पाएगा क्योंकि वो बिकता नहीं है. उसके पैसे नहीं मिल सकते. ख़ुद को ख़ुश करने के लिए कभी कविताएं लिख लेता हूं. नाटक लिखता हूं. जो कुछ मुझसे हो सका है अब तक उससे मैं बहुत ख़ुश हूं. सफ़र तो अभी जारी है.

Source: BBC

Monday, April 13, 2015

आज तुम इतने बुझे-बुझे से क्यों हो?



शाम का अँधेरा गहरा होता इस से पहले तुमने मुझे जलाया...
मैं लालटेन की तरह जलता रहा...तुम अपने सारे काम जल्दी-जल्दी निपटाती रही... काम पूरा हुआ, रात होने को है, अब तुम्हे सोना है शायद !!तुमने लौ कम करके फूंक मार कर मुझे बुझा दिया..तुम सो गए ...मैं बुझ गया...तेरे सपने ने मुझसे पूछा था,जब तुम नींद में थे...आज तुम इतने बुझे-बुझे से क्यों हो? - हीरेंद्र

Wednesday, March 11, 2015

Really wonderful

1. Ignore 1-star and 5-star reviews of books, hotels and products. The 3-star reviews will answer all your questions.
 2. When you’re a host, use that experience to learn how to be a better guest, and vice-versa.
 3. If you want to be fit, become someone who doesn’t skip or reschedule workouts. Skipping workouts is always the beginning of the end.
 4. Learn keyboard shortcuts. If you don’t know what CTRL + Z does, your life is definitely harder than it has to be.
 5. Become a stranger’s secret ally, even for a few minutes. Your perception of strangers in general will change.
 6. Get over the myth that philosophy is boring — it has a history of changing lives. It’s only as boring as the person talking about it.
 7. If you’re about to put down a boring a non-fiction book, skim the rest of it before you move on. Read the bits that still appeal to you.
 8. Ask yourself if you’ve become a relationship freeloader. Initiate the plans about half the time.
 9. Notice how much you talk in your head, and experiment with listening to your surroundings instead. You can’t do both at the same time.
 10. Reach out to people you know are shy. It’s hard for them to get involved in social things without somebody making a point of including them.
 11. Learn the difference between something that makes you feel bad, and something that’s wrong. A thing can feel bad and be right, and it can feel good and be wrong.
 12. If you need to stop for any reason in a public place, move off to the side first.
 13. Before you share an interesting “fact” on Facebook, take thirty seconds to Google it first, to see if you’re spreading made-up bullshit.
 14. Clean things up right away, unless your messes tend to improve with age.
 15. Consciously plan your life, or others will do it for you.
 16. Be suspicious when someone uses the words “Justice” and “Deserve” a lot. Be suspicious when you use them yourself.
 17. Get rid of stuff you don’t use. Unused and unappreciated things make us feel bad.
 18. Expect people to get offended sometimes when you try to tell them what to do. Even if you think it’s good advice :)
 19. Once in a while, imagine what it would be like if you really did lose all your data and had only your current backups.
courtesy: Raptitude.com

Tuesday, March 10, 2015

Vinod Mehta

सुनिए बीबीसी के खज़ाने से मशहूर पत्रकार और एडिटर दिवंगत विनोद मेहता के साथ ख़ास बातचीत.
इस बातचीत में उन्होंने अपने बचपन के दिनों से लेकर पत्रकारिता में आने तक के और कुछ मशहूर हस्तियों के साथ मुलाक़ात की दास्तान सुनाई.


http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2015/03/150310_150310_vinod_mehta_interview_pkp


Tuesday, January 20, 2015

सुनंदा पुष्कर मर्डर: पुलिस ने शशि थरूर से पूछे 6 बड़े सवाल



सुनंदा पुष्कर की रहस्यमय मौत के मामले में एसआईटी ने कांग्रेस एमपी शशि थरूर से पूछताछ की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि थरूर होमवर्क करने के बाद पूरी तैयारी के साथ आए थे और पुलिस के सवालों के जवाब पूरे आत्मविश्वास से दे रहे थे। 


पुलिस ने शशि थरूर से 10-15 सवाल पूछे, जिसमें से 6 बड़े सवाल हैं ...
1. कमरे में अलप्राक्स (alprax) की गोलियां क्यों थीं, जबकि डॉक्टर ने उन्हें सुनंदा के लिए नहीं लिखा था? 

2. सुनंदा के शरीर पर चोट के 15 निशान क्यों मिले? क्या आपने उन्हें मारा था? 

3. जब वह कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रही थीं, तो उन्हें तुरंत हॉस्पिटल क्यों नहीं ले जाया गया? पुलिस को तुरंत फोन क्यों नहीं किया गया? 

4. एम्स के डायरेक्टर को मौत के संभावित कारण सुझाते हुए ईमेल क्यों किए गए? 

5. आपने यह क्यों बताया कि सुनंदा को ल्यूपस (Lupus-त्वचा का एक रोग) है, जबकि उन्हें वह नहीं था। 

6. आप (पाकिस्तानी पत्रकार) मेहर तरार को कैसे जानते हैं? क्या आप उनके साथ दुबई में ठहरे थे?

Friday, January 09, 2015

उसकी आँखें, उसकी बातें, उसकी यादें, उसके ख्वाब




एक नादान मोहब्बत का बस इतना सा हिसाब,
चंद शेर, चार खत और कुछ सूखे गुलाब...
एक ज़िन्दगी जी लेने के लिए इतना काफी है,
उसकी आँखें, उसकी बातें, उसकी यादें, उसके ख्वाब- हीरेंद्र

Thursday, January 08, 2015

मुझको भी एक अमित शाह चाहिए


                                                सत्ता, ताकत और रूतबा चाहिए...
                                                मुझको भी एक अमित शाह चाहिए...
                                                कि सर झुका के मुझे कोई साहेब कहे...
                                                 आडवाणी सरीखा मौन सब सहे...
                                                 सर्दियों में थामे चाय की केटली...
                                                  हो बगल में खड़ा कोई जेटली...
                                                राज़दार हो न हो राजनाथ चाहिए...
                                               मुझको भी एक अमित शाह चाहिए... हीरेंद्र





Wednesday, January 07, 2015

विद्या बालन: हुस्न और हुनर की मल्लिका


न्यू ईयर का जश्न और बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन का बर्थडे दोनों एक ही दिन यानि सोने पर सुहागा। दुनिया चाहे कुछ भी कह ले अगर आप खुश हैं तो कोई फर्क नहीं पड़ता जी हां यह कहना है बॉलीवुड की बिदांस गर्ल विद्या बालन का। उनका कहना है कि हमें खुश होकर अपने अनुसार जीना चाहिए। हम सबकी फेवरेट विद्या बालन न्यू ईयर और बर्थडे साथ-साथ मनाती हैं। विद्या बालन ने हिन्दी सिनेमा में आज वह स्थान बना लिया है जहां कभी माधुरी और हेमा मालिनी जैसी अभिनेत्रियां खड़ी थी। आज उनकी उपस्थिति दर्शकों को सिनेमाघर में खींचने के लिए काफी होती है। विद्या बालन का जन्म 01 जनवरी, 1978 को केरल में हुआ था। उनके पिता पी. आर बालन ईटीसी टीवी के वाइस प्रेसीडेंट हैं और मां सरस्वती होममेकर हैं। सेंट एंथनी गर्ल्स हाई स्कूल, केरल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर विद्या बालन ने सेंट जेवियर कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई से उन्होंने एम. ए.  की डिग्री ली। विद्या तमिल और मलयालम को मिक्स करके बोलती हैं, जबकि उन्हें हिंदी, मराठी, अंग्रेजी और बंगाली भाषा भी आती है। बचपन से वे शबाना आजमी की फैन थीं और माधुरी दीक्षित की अदाकारी उन्हें पसंद थी।
16 साल की उम्र में विद्या ने पहली बार कैमरे के सामना किया एकता कपूर के सीरियलहम पांच के लिए। इसमें वे राधिका बनी थीं। इसके बाद उन्हें कई ऑफर आए, लेकिन उन्होंने पढ़ाई पूरी करने पर ध्यान लगाया। सोशियोलॉजी में बैचलर डिग्री फिर मास्टर डिग्री ली। मास्टर डिग्री के दौरान विद्या को मलयालम फिल्मचक्रममें मोहनलान के अपोजिट लीड रोल निभाने का मौका मिला और उन्होंने 12 मलयाली फिल्में साइन भी कर लीं। लेकिन कुछ कारणों सेचक्रमनहीं बन पाई और मलयाली इंडस्ट्री में विद्या को बैड लक का कारण बताया जाने लगा। डायरेक्टर यहां तक कहने लगे कि विद्या को एक्टिंग आती ही नहीं है। इसके बाद विद्या ने 60 से ज्यादा टीवी कमर्शियल और कुछ म्यूजिक वीडियो किए। इनमें से ज्यादातर प्रदीप सरकार ने डायरेक्ट किए थे।
सादगी और खूबसूरती की मिसाल के तौर पर जानी जाने वालीं विद्या की पहली फिल्म बंगाली थी, जो 2003 में रिलीज हुई- भालो थेको। जो बंगाली भाषा में बनी थी, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए आनंदलोक पुरस्कार से नवाजा गया। इसमें उनके काम को खूब सराहा गया।   2005 में फिल्म 'परिणीता' में भावपूर्ण अभिनय कर खूब प्रशंसा बटोरने वालीं विद्या ने अपने करियर को नया ट्विस्ट दिया। यह फ़िल्म ज्यादा नही चली, परन्तु इस फ़िल्म में उनके अभिनय के लिए आलोचकों द्वारा सराहा गया। उन्हें उभरती अभिनेत्री के लिए सर्वश्रेष्ठ नई अदाकारा फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन हुआ । यहां से विद्या के करियर में सफलता का दौर शुरू हुआ।
2006 में, वह संजय दत्त के साथ धमाकेदार फ़िल्म लगे रहो मुन्नाभाई में दिखाई दी।   एक बार फ़िर उसके अभिनय की चर्चा फिल्मी पंडितों के जुबान पर थी और यह उस वर्ष की दूसरी सर्वाधिक सफल फ़िल्म रही इमणि  रत्नम की फ़िल्म गुरु, 2007 में बालन की पहली फ़िल्म थी जिसमें वह एक अपाहिज की भूमिका में थी, को आलोचकों द्वारा काफी सराहा गयाI इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा किया और उसके अभिनय के लिए उन्हें सराहा गया ई उनकी बाद की दो प्रदर्शित फिल्में, सलाम-ए-इश्क़: अ ट्रिब्यूट टू लव (2007) और एकलव्य: द रॉयल गार्ड (2007) हांलांकि ज्यादा चली नहीं, लेकिन दूसरी फ़िल्म को ऑस्कर की 80 वीं अकादमी पुरस्कार के लिए भारत की ओर से नामित किया गया।   साल के दो रिलीज में हे बेबी (2007) और भूल भूलैया  (2007) ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा किया।  ‘ डर्टी पिक्चर जैसी बोल्ड मूवी करके वे सिनेमाजगत में छा गईं।कहानी को विद्या ने अपने दम पर फिल्म को सफलता का तमगा दिलाया और हीरोइन-प्रधान फिल्मों का नया दौर शुरू किया।
विद्या बालन कहती हैं कि ‘’ पहले मेरे लिए सिर्फ काम था। अब मैंने एंजॉय करना सीखा है। मेरी मां कहती हैं कि मैं पैदा औरत की तरह हुई थी लड़की अब बनी हूं। दरअसल बचपन से ही मुझे कुछ अलग करने का जुनून था। मैं काफी गंभीर थीं। कुछ कर दिखाना चाहती थी लेकिन रास्ता नहीं पता था। मेरे परिवार, पड़ोस और रिश्तेदार में किसी का भी फिल्मी दुनिया से ताल्लुक नहीं था और जब मैंने अपने माता पिता को बताया कि मैं अभिनय करना चाहती हूं तो उन्हें लगा कि हर लड़की का सपना अभिनेत्री बनने का होता है।’’
फिल्म परिणीता से लेकर “द डर्टी पिक्चरतक उन्होंने अपने रूप को कई बार बदला। उनके बदले रूप को कई बार तो दर्शकों ने सराहा पर कई बार उनका बदला स्वरूप दर्शकों को पसंद नहीं आया।   फिल्म परिणीता और पा जैसी फिल्मों में उनका भोला रूप जहां दर्शकों को दीवाना कर गया तो वहीं इश्किया में हॉट अवतार में भारतीय नारी के किरदार में भी उन्होंने खूब वाह वाही बटोरी।   विद्या बालन को अपने अभिनय के लिए अभी तक 4 बार फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है इसके अलावा भी विद्या बालन को कई राष्ट्रीय व अंतरर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।   
पिछली कुछ फिल्मों से विद्या बालन अपने लुक के प्रति ज्यादा सजग हो गई हैं। फिल्मों के प्रचार के समय भी वह किरदार के लुक में ही नजर आती हैं। लुक के प्रति इस लगाव के बारे में वह कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि प्रचार के समय फिल्म के किरदार के लुक में आने पर लोगों का ध्यान जाता है। अभी फिल्मों की रिलीज के समय सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि दर्शक कैसे आकर्षित हों और उन्हें फिल्म याद रहे। लुक में लगातार देखने से फिल्म उनके जहन में बनी रहती है। रही बात फिल्मों में लुक बदलने या उन पर जोर देने की तो इस संबंध में यही कहूंगी कि स्कोप होने पर ही लुक पर काम करती हूं। पिछली पांच फिल्मों में मैंने लुक पर विशेष ध्यान दिया।शादी के साइड इफेक्ट्स में मेरा रेगुलर लुक है। उसमें वेस्टर्न लुक और कैजुअल ड्रेसिंग है।बॉबी जासूस में मेरे छह गेटअप हैं।
विद्या बालन मेथड एक्टिंग में यकीन करती हैं। उन्हें किरदार में ढलने का चस्का है।बॉबी जासूस के लिए उन्होंने मुगलपुरा मोहल्ले की तस्वीरें और वीडियो फुटेज मंगवाए। वहां के किरदारों को देखा-समझा। वह हंसते हुए स्वीकार करती हैं, ‘छोटी-छोटी चीजों से कोई किरदार बनता है। किरदार के परिवेश की वाकिफियत जरूरी है। भाषा, चाल, लहजा और रिएक्शन में वह दिखता है। हर बार लगता है कि विद्या बालन को अगली फिल्म मिल पाएगी या नहीं, क्योंकि महिलाओं को केंद्र में रख कर बहुत कम फिल्में लिखी जाती हैं।बॉबी जासूस जैसी फिल्मों से उन्हें अगला मौका मिल जाता है। आखिर यह कैसे संभव होता है? विद्या स्पष्ट करती हैं, ‘अच्छी भूमिकाओं की चाहत में ऐसी स्क्रिप्ट मुझे आकर्षित करती है। बई बार स्क्रिप्ट भी मुझे खोज लेती है। कहीं कहीं यह चाहत दोतरफा है।
चूंकि खान हिंदी फिल्मों में कामयाबी के पर्याय माने जाते हैं,इसलिए विद्या बालन की अप्रतिम कामयाबी के मद्देनजर उन्हेंलेडी खानटायटल से नवाजा गया। तब विद्या बालन ने मजाक में ही एक सच कहा था कि अब औरों की कामयाबी विद्या बालन से आंकी जानी चाहिए।बहरहाल,‘किस्मत कनेक्शन के समय चौतरफा विध्वंसात्मक आलोचना और छींटाकशी के केंद्र में आई दक्षिण भारतीय मूल की इस मिडिल क्लास लडक़ी ने साड़ी पहनने के साथ लक्ष्य साधा और फिरइश्किया से अपने कदम बढ़ा दिए।हिंदी फिल्मों की निर्बंध नायिका विद्या बालन ने उसके बाद हर नई फिल्म से खास मुकाम हासिल किया। पहलेडर्टी पिक्चर और फिरकहानी उन्होंने इस कथित सच को झुठला दिया कि हिंदी फिल्में सिर्फ हीरो के दम पर चलती हैं और हीरोइनें तो केवल नाच-गाने के लिए होती हैं। नाच-गानों से विद्या बालन को परहेज नहीं है। वह इनके साथ ही चरित्रों की गहराई में उतरना जानती हैं। वह उन्हें विश्वसनीय और प्रभावपूर्ण बना देती हैं। अभिनय के साथ उनमें आम भारतीय महिला का लावण्य है। उन्होंने सबसे पहले नायिकाओं केलिए जरूरीजीरो साइज का मिथक तोड़ा। अपनी जोरदार कामयाबी से उन्होंने लेखकों-निर्देशकों की कल्पना को विस्तार की संभावनाएं दी हैं। अब वे पर्दे पर मनचाही नायिकाओं का सृजन कर सकते हैं। विद्या को कविताएं लिखने का शौक है। उनकी एक डायरी है, जिसमें वे लिखती हैं। साड़ी को फैशन का हॉट ट्रेंड बनाने का श्रेय भी विद्या को ही जाता है। वे फीयरलेस हैं, कभी ये नहीं सोचतीं कि फलां क्या सोचेगा।

एक इंटरव्यू में उन्होनें कहा कि वह बहुत ही आध्यात्मिक है और उनका भगवन में दृढ़ विश्वास है और वह हर गुरुवार को मन्दिर जाती है। विद्या बालन ने 2012 में सिद्धार्थ राय कपूर के साथ शादी की है और वह अपनी शादीशुदा जिंदगी से बेहद खुश है। विद्या भारत सरकार की एक मुहिम से भी जुड़ी हुई हैं, जिसके तहत गांवों में घरों में शौचालय बनाने के प्रति लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए गए थे।   विद्या दावा करती हैं कि उनकी यह मुहिम बहुत कामयाब रही।  " विद्या कहती हैं सच तो यह है कि छोटे शहरों और गांवों में अब भी हालात चिंताजनक हैं। महिलाएं जूझ रही हैं और छोटे क्या बड़े शहरों में भी महिलाओं के प्रति अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। यह बड़ी शर्मनाक बात है। " सिनेमा और सामाजिक सरोकार दोनों को साथ-साथ लेकर आगे बढ़ने में सक्षम विद्या बालन आज की युवतियों के लिए एक मिसाल है!