Thursday, August 15, 2019

#MissionMangal Review

'मिशन मंगल' एक बेहतरीन और इंस्पायरिंग फ़िल्म है.. पहले ही प्रयास में भारत के मंगल ग्रह पर पहुंचने की कहानी के साथ यह फ़िल्म कई अन्य विषयों को भी बखूबी ढंग से दिखाती है.. जैसे कि जवान हो रही पीढ़ी के साथ माता-पिता का व्यवहार कैसा हो या फिर किसी तलाकशुदा औरत को मकान मिलने में कितनी परेशानी होती है..वगैरह.. वगैरह.. इस तरह की कई छोटी-छोटी बातें फ़िल्म में इस तरह से पिरो दी गई हैं कि वो आपको हँसाती भी हैं, रुलाती भी हैं और ठहरकर सोचने पर भी मजबूर करती हैं! डॉयलॉग जबर्दस्त है..कुल मिलाकर एक मनोरंजक फ़िल्म..पूरे परिवार के साथ देख आइये.. मेरी रेटिंग 5 में से 5 स्टार.. शुक्रिया.. #हीरेंद्र

Wednesday, August 07, 2019

सेल्फिश पोस्ट

बड़ी ही विनम्रता से कहना चाहता हूँ कि मैं इनदिनों अपनी ही उलझनों को सुलझाने में जुटा हूँ.. मुझे पूरा विश्वास है कि कश्मीर से लेकर दिल्ली तक का माहौल आप सबलोग मिलकर संभाल ही लेंगे.. हम खुद को ही संभाल सकें, मेरे लिए यही बहुत होगा.. आप चाहें तो मुझे सेल्फिश कह सकते हैं..#हीरेंद्र

Saturday, August 03, 2019

अगर मैं बचा रहा : हीरेंद्र

बहुत मुश्किल होता है घर-परिवार से दूर परदेस में अकेले रहना.. छोटी-छोटी बातें कितनी बड़ी लगने लगती हैं.. कई बार किसी के हाथों की चाय पीने की तड़प भी पागल कर देती है..  कई बार तो दो-तीन दिन तक लग जाता है किसी इमोशन से बाहर आने में.. खुद को संभालने में.. सामान्य होने में..

मुंबई में रहते हुए मुझे लगभग चार साल हो गये और ये मेरी नाकामी ही है कि इस दौरान मैं एक शख्स भी ऐसा नहीं खोज सका जिससे मैं अपने 'मन की बात ' कह पाऊँ.. इस शहर में बस 'काम की बात' ही संभव है..

और काम भी बहुत है इनदिनों.. इतना कि कभी कभी सोलह घंटे कीबोर्ड पर अंगुलियां घिसता रहता हूँ..  लेकिन, एक बार भी काम से ध्यान हटा.. तो फिर परेशानी बढ़ जाती है.. फिर लिखने लायक मन बनाने में दो-तीन-चार दिन भी लग जाते हैं.. और इस दौरान सब बेमतलब, बेमानी सा लगने लगता है!

मैंने इस विषय पर कभी किसी से खुलकर कोई बात नहीं की.. सोशल मीडिया पर भी कभी कुछ नहीं लिखा.. क्योंकि लोग फिर आपको जज करने लगते हैं.. परखने लगते हैं..  बेवकूफ समझते हैं..  और कई बार आप खुद भी ये नहीं चाहते कि अपना ग़म यूं उघाड़ कर दुनिया को दिखायें! एक मुखौटा पहने होते हैं हम सब.. शायद मैं भी अपवाद नहीं..

आज पता नहीं इतना सब क्यों लिख गया.. और ये भी नहीं जानता कि आप ये सब पढ़कर मेरे बारे में क्या सोचेंगे? बस इतना जानता हूँ कि अगर मैं बचा रहा तो एक दिन कई ख्वाबों को नये पंख देकर जाऊंगा! #हीरेंद्र की डायरी

Monday, July 29, 2019

ये सब कोई नहीं बताएगा, पढ़ लीजिये। फायदे में रहेंगे! #हीरेंद्र

आप सबकी सुविधा के लिए क्रम से लिख देता हूँ.

१. अगर आपका कैमरा चोरी हो जाए तो परेशान न हों. आप Stolencamrafinder.com पर जायें।  जहाँ आप अपने कैमरे से खींची हुई कोई तस्वीर अपलोड कर दें (हर फोटो का एक एम्बेड नंबर होता है). जब कोई आपके कैमरे से खींची गयी तस्वीर इंटरनेट या सोशल मीडिया पर कहीं शेयर करता है तो इसकी सूचना आपको मिल जायेगी। फिर आप चोर का लोकेशन थोड़ी कोशिश करके पा सकते हैं.

२. Duolingo.com पर जाकर आप कोई भी दूसरी भाषा आसानी से सीख सकते हैं. हाँ अभ्यास करते रहना होगा।

३. आपकी नींद पूरी नहीं हुई है. चलिए कोई बात नहीं। अब ये कीजिये कि मन में सोच लीजिये की आप बहुत ही गहरी नींद से जागे हैं और तरोताज़ा महसूस कर रहे हैं. सिर्फ ऐसा करके ही आप दिन भर बेहतर महसूस कर सकते हैं. यकीन नहीं, चलिए कभी आज़मा कर देखिये। हाँ, इस दौरान ये भूल से भी मत सोचियेगा कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है.

४. मान लीजिये आपने किसी गाड़ी को टक्कर मार दी. अब टक्कर मार तो दी लेकिन, उस वक़्त सॉरी नहीं बोलियेगा। आपका सॉरी बोलना कोर्ट में आपके खिलाफ जा सकता है. ज़ाहिर है सॉरी बोलकर आप अपनी गलती मान रहे हैं.

5. तारीख के हिसाब से पैसे बचाइए। जैसे एक तारीख को एक रूपया। दो तारीख को दो रूपया , उसी तरह 30 तारीख को 30 रूपया। ऐसा आप एक साल तक रोज़ करें। यह बचत बहुत आसान है. जानते हैं एक साल के बाद आपके पास कितने रुपये होंगे। लगभग 5 हज़ार सात सौ रुपये। तो कब से शुरू कर रहे हैं ये बचत?

६- अगर आप हवाई यात्रा करते हैं तो 6 से 8 सप्ताह पहले टिकट बुक करें। टिकट आप मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही बुक करें। यात्रा का दिन भी मंगल, बुध या गुरुवार हो. इस दिन टिकट सबसे सस्ता होता है. रविवार को उड़ना तो छोड़िये टिकट बुक करना ही महंगा पड़ता है. क्योंकि ज़्यादातर लोग रविवार को ही फुर्सत में होते हैं टिकट बनाने के लिए.

७- क्या आपको पैसे कमाने हैं? अगर आप 87 दिनों तक एक बिस्तर पर ही बैठे रह सकें तो नासा आपको 15 हज़ार डॉलर देता है। दरअसल वो ऐसा करके उनकी ज़ीरो ग्रेविटी पर रिसर्च करने की योजना है.


सोर्स: Pinterest.com

Saturday, July 27, 2019

घड़ी को गुदगुदी लगाता हूँ- हीरेंद्र

तू किसी रेल सी गुजरती है
मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ -दुष्यंत कुमार


अब मेरी तुकबन्दी देखिये
रात तू चाँद बन निकलती है
मैं आसमाँ तारों से सजाता हूँ
मन में एक रौशनी उतरती है
जब तुझको गले लगाता हूँ
शाम में रंग भरने लगता है
जब तेरा नाम गुनगुनाता हूँ
मिलन का है मज़ा जुदाई में
आज जाने दे कल आता हूँ
मेरी लाइफ तुझी से रौशन है
जो भी मिलता उसे बताता हूँ
कभी तो वक़्त मुस्कुराएगा
घड़ी को गुदगुदी लगाता हूँ #हीरेंद्र


'अभागा सावन' - हीरेंद्र

एक कवि ने अब सावन पर लिखना बंद कर दिया है. लिखे भी क्यों जब इन बादलों से ज़्यादा पानी उसकी आँखों में है? बचपन में वो लिखा करता था बादलों के नाम ढेरों प्रेमपत्र और फिर उनकी नाव बनाकर वो बहा देता था किसी अंजाने पते पर. इस उम्मीद में कि एक दिन ज़रूर आएगा उसके इन चिट्ठियों का जवाब!

सुना है कि इस मौसम में कभी वो बेलपत्रों पर ॐ नमः शिवाय का मंत्र भी लिखा करता तो  कभी किसी की हथेली में लगी मेहँदी में ढूंढता था अपना लिखा नाम. जिन हरी काँच की चूड़ियों ने कभी उसका मन खनकाया था वो अब टूटकर उसके कलेजे में कहीं धँस सी गई है. अब उसके लिए सावन का मतलब सिर्फ बारिश होने का एक मौसम भर है.

अब उसके मन में कोई मोर नहीं नाचता. सावन के झूलों का तो पता नहीं लेकिन, अब वो झूलता रहता है अतीत के उन अँधेरों में जहाँ अब उसे कोयल की कूक भी झूठी लगती है.  इतना अभागा ये सावन कभी न था. क्योंकि एक कवि ने अब सावन पर लिखना बंद कर दिया है. #अभागासावन #हीरेंद्र

Friday, July 26, 2019

एक छोटी सी कविता

आते हैं रात में भी दिन के ही ख़्वाब मुझको
काँटे भी चल के आये देने गुलाब मुझको
आँखों में बच गया है थोड़ा सा अब भी पानी
नहीं चाहिए जी छोड़ो कोई हिसाब मुझको
जल रहा हूँ मैं तभी से क्या बताऊँ ये किसी से
कोई कह के हाँ गया था इक दिन तेज़ाब मुझको
बस यही है एक ख़्वाहिश न चाहूँ इससे ज़्यादा
गुज़रुं जिधर से दुनिया करे आदाब मुझको #हीरेंद्र

#MissionMangal Review

'मिशन मंगल' एक बेहतरीन और इंस्पायरिंग फ़िल्म है.. पहले ही प्रयास में भारत के मंगल ग्रह पर पहुंचने की कहानी के साथ यह फ़िल्म कई अन्य ...