Friday, March 28, 2014

अपनी रहमत के खज़ानो से अता कर मालिक...
ख्वाब औकात में रह कर नहीं देखे जाते 

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छोटी कविता

जनता जो भीड़ है भीड़ जो गुम है.. गुम बोले तो बेबस बेबसी यानी घुटन घुटन बोले तो अंत अंत तो मौत है भीड़ ने एक चेहरा चुना चेहरे पर एक पह...